बहती धारा,,,,,,,,,,

बहती धारा थी वो नीम॔ल सी
हर पहर से अगडाई लेती
फीरती थी लहरो की चाल मे
एक आरजु की तमन्ना लीए
चदं लम्हो के खातिर यु
जा गीरी सागर की आगोश मे
समर्पित कर रूह अपना
तरासने चली मोती का खजाना
उसे खबर कहाँ थी उस बर्बादी का
जशन ऐ तुफान काली घटा का
जुदा हुए दो पक्षी तमन्नाओ का
रेत मे लिपटी उनकी नीशान
हर ज॔रे की बस यही कहानी
मीट ना पाये यादो की किस्त
तेरे दामन का साथ यु लहरो मे
सदा के लीए यु डुब गया
है याद शाहीलो के फसाने मे
उगता सूरज डुबता सूरज
तेरा चेहरे का है आईना
कट रही बस जिन्दगी की धारा
बीन मौज भरी रवानगी
बहती धारा,,,,,,,,,,
हर पहर से,,,,,,,,,

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I love my creative writing. ...

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