ठीठूरता बदन,,,,,

यु बड़े मकान महलो की शान
पास मे ही था आलीशान
पुश की ठंडी हवा की शनशनाहट
एक जान थी जमीन पर लेटी
था छोटा सा एक कपडे का टुकडा
उसके बदन पर अधुरा लीपटा
चरमराती सी साॅसो का संगम
रास्तो से गुजरता भीड की दुनिया
मंद ऑखो से देखता रहा वो सबको
ठीठूरता बदन से कापता रहा वो
देखी ना कभी ऐसी खुदाई
यु बडा मकान, ,,,,,,
पास मे ही था,,,,,,,,
रोटी का एक टुकडा था पास मे
कुत्ते भी थे उसी आश मे
रात बढती गई ओश की चादर से
अब तो भीड़ भी कम हो चली
काफिला भी हट चुका था
वो बेजान पलकों से व्या कर रहा था
अंतिम साॅसो का चलना
हर पल उसकी थम गई
यु बडे,,,,,,,,,
पास मे ही,,,,,

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