आईने……..

आईनो के चादर हटा कर तो देखे
लिखी हुई कलम से सजा कर तो देख
कच्ची मीट्टी की मुरत होगी साॅखो पर
उसे अंधेरी गलीयो से उठा कर तो देख
टुटी हुई है मन की घावो से
एक शैलाब गिरी है उसकी नयन से
तडपता है मन बोझल सांसो का
हर जरेॅ पर जा कर तो देख
कौन सी दस्तक थी उसके जाने का
उस तक ये पैगाम जगा कर तो देख
कीस जन्म तक होगी आहट आने का
ये मन मे दीप जला कर तो देख
हर महफील मे उसकी सांसो का
हर साज सजा कर तो देख
आईनो के …………
लिखी हुई …………

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I love my creative writing. ...

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