इतने गैर नही……..

इतने गैर नही की तेरा दीदार ना हो पाये
इश्क ये मोहब्बत का इजहार ना हो पाये
मुरादो से भरी है तेरे चाहतो का बाते
हर गली हर शहर बस तेरा ही नजराना
बातो की खुशबु तेरे यादो की झनकार
कर जाती इन पलो से टकरार
सुखे पत्तो की सरसराहट ये बदला हुआ रूख
रातो के जुगनु तारो का टीमटीमाना
कहती है आकर एक नया फसाना
देखता है कही दूर अरमान भरी नजरो से
छूता है मुझे हवा के पलको से
सदीयो की बात अभी थमी नही है
मीलन की रात अभी जगी नही है
इन्तजार तो पहले भी था अभी भी है
बस अब तेरा साथ नही है
इतने गैर…………….
इश्क ये……………..

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