सोचा ना था…..

सोचा ना था कभी ऐसा करवटो की आहट
देखा ना था कभी जमी से आसमा की चाहत

खामोशी की नजारो से पत्तो की आहट तक
हुई थी जब बारिशो का पानी मजारो पर

धुली सी थी एक कहानी की आहट
सागर के हीलोरे पवन के झोका

कहती है कुछ कानो मै आकर
सोचा ना था कभी ऐसा करवटो की आहट

बंदीसो की शैलाब सी थी जमाने की
जब उजडी थी कीसी दील की बस्ती

थम सी गई थी साँसो की आहट
रूक सी गई थी पवन कि झोका

सोचा ना था कभी ऐसा करवटो की आहट
देखा ना था कभी जमी से ……….

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I love my creative writing. ...

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