लिवास

तेरे सर ताजो का ताज बस यही तक
तेरे रेशमी लिवास बस यही तक
बंजारो सा ये दुनीया बस यही तक
थम जायेगी सांसे कौन जाने कीस गली तक
रहने दे ये मुशाफीर मेरे ही पैमाने मे
कौन जाने बीखरेगी मोती कीस कडी तक

तेरे सर ताजो का ताज बस यही तक
तेरे रेशमी लिवास बस यही तक
सुखे पत्तो सी जलेगी तेरे मोम सी चमडी
मीठे बोल रह जायेगी तेरी बस यही तक
यादे रह जायेगी तेरी बस यही तक
तेरा होगा फरमान जारी बस तेरे खुदा तक

तेरे सर ताजो का ताज बस यही तक
तेरे रेशमी लिवास बस यही तक
समेट लो तुम अपनी बीखरी तन्हाइयो को
जब तक हो यहाँ तुम तभी तक
जीने की चाहत को ढुढों तुम हर कही तक
बीते पलो को छोडो आने वाले पलो को छोडो
जो है बस आज ही है हम सभी तक
तेरे सर……………….

My dear few followers  if do u like this poem then plz shear it ….becoz it is related to life.how to live life & make happiness life.

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I love my creative writing. ...

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