आशियाना 

आशियाना एक जला है अभी
सुनहरा ख्वाब टुटा है अभी
मचलने दे भीगे हुए पलको को
जो साज जुडा था कभी
बंजर सी है तकदीर की राहे
ए मेरे मालिक
जा चुका वो उन पनाहो की गोद मे
मेरा नजराना तो बस यहाॅ तक ही
बरसने दे काली घटाओ को अभी
तरसने दे जुगनुओ को अभी
ए मेरे मालिक
था एक हवाओ का छोका
दे गया हर चीलमन को धोखा
एहसास ए फरेबी थी अभी
बाली उम्र की सभी
ए मेरे मालिक

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I love my creative writing. ...

3 thoughts on “आशियाना 

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