रूखशत

हर जगह देखा और मुझे ढुंढा तो होगा
हर एक सांश मे मेरा नाम लीया तो होगा
हर पलके आंसु मुझे महसुस किया तो होगा
अंतिम सांश लेने से पहले मेरी परछाईयो
से मिला तो होगा
यह जग छोडने से पहले मेरे लिए
रोया तो होगा
हर आंसु मेरे लिए पलको से
बहाया तो हो गा
तन्हा अकेले छोडने से पहले मेरे बारे
मे सोचा तो होगा
तु ये शहर छोडने से पहले मुझे गलीयो
मे ढुंढा तो होगा
अर्थी जाने से पहले मेरा इन्तजार किया
मेरा किया तो होगा
अंतिम विदाई मे मेरे हाथो से फुल गिरे
ये सोचा तो होगा
मेरे रेशमी दूप्पटे तेरा कफन बने
ये सोचा तो होगा
ये फरीयाद रब से किया तो होगा॥
रास्ते का हर मंजर देख मुझे ना
पाकर हॅसा तो होगा
बेवफाई कि फरियाद अंतिम सांशो मे
रब से किया तो होगा
जब तुझे शइया पर लिटाया होगा
बाहे तेरी मुझे ढुंढा तो होगा
आग कि लपटे लगने से पहले मुझे एक
बार याद करके रोया तो होगा
और ये कहा तो होगा॥
जा मेरे हमराही हमसफर छोड चले तेरे
इस जहां को
तुझ से दुर और एक नई दुनिया मे
खुश रहना सदा अपनी इस दुनिया मे
जहाँ तुझे मेरा साया तक ना मिले
दुर तक तु मुझे ढुंढे लेकिन मेरी
परछाई भी तुझे ना मिले
तेरी ऑखे इन्तजार तो करे लेकिन
पहर दोपहर ना मिले॥॥

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